24 May 2007

गुमनाम है कोई

कुछ रिश्तों के नाम होते है ,
पर वो हमेशा नाकाम होते है ।
कुछ रिश्ते रोज दिखते है,
पर उनमें देखने वाली कोई बात नही होती ।
और
कुछ रिश्ते दिखाई नही देते
पर वो हमेशा साथ होते है ।
काश कि सबको एक ऐसा रिश्ता मिले
जिसे नाम ना देना पडे
जो गुमनाम भी ना हो

5 comments:

renu ahuja said...

जो गुमनाम भी ना हो, क्या बात है उस रिशते की
नाम भी न देना हो जिसे, ज़िदगी सौगात उसी रिशते की
मगर ज़िन्दगी सिलसिला टूटने जुड़्ने का,
सजी हर गले में माला किसी रिशते की.

यतिन जी लिखते रहिये, बहुत खूब ख्याल है.
-रेणू.

sunita (shanoo) said...

बहुत खूब!
वो रिश्ते जिन्हे नाम भी ना दें और गुमनाम भी ना हो...बहुत उलझन है...
वो बस दिल के रिश्ते होते है...दिल पर ही नाम लि्खा होता है...समाज उन्हे कोई नाम नहि देता मगर दिल उन्हे अपने अन्दर बसाता है...जो आँखो से उतर कर दिल में बस जाते है...

सुनीता(शानू)

SURJEET said...

Most of us have the inclination to very easily become addicted or attached to that which gives us pleasure, be it people or something else. There is a tendency within us to repeat the good experiences and at times we are prepared to do everything possible to repeat the enjoyable experience in the future.

Anonymous said...

wah yatish ji,

bahut khoob likha hai

जिसे नाम ना देना पडे
जो गुमनाम भी ना हो

jab bhi baat mein, do opposite cheezein mil jayein, tab bhi ajeeb na lage, bilkul sahi laage, to likhne wale ki khoobi saaf dikhti hai, yeh tai hai, ki kuch KHAS baat likh di gayi hai..

aapki sabhi kavitayein pasand aati hain.. par yeh to bahut hi aachi lagi - bahut khoobsoorat vichar..

"jo gumnam bhi na ho"
ka vajan bahut bhari hai...
:-)

bahut khoobsurati se likha hai ..

shukriya!

मीनाक्षी said...

कुछ रिश्ते दिखाई नही देते
पर वो हमेशा साथ होते है ।
बहुत सच्ची बात कह दी आपने ।
रिश्ते जिनका नाम नहीं होता या जो दिखाई नहीं देते ,
वे अनमोल होते हैं और दिल की गहराइयों में सहेज
कर रखे जाते हैं।