02 June 2007

आओ कुछ रंग बांटे

शब्दों मै भी तो रंग होते हैं,
या कहें हर शब्द एक रंग का नाम हैं,
तभी तो गीत, कहानी, ग़ज़ल, कविता
कितने रंग लिए होते हैं अपने आप में।

सभी रंग दिखाई नही देते;
महसूस भी किये जाते हैं,
सुख-दुःख, ख़ुशी-गम
और ना जाने कितने...

ये रंग ही तो हैं
जिनसे ज़िन्दगी चलती हैं,
ये ना हों
तो कुछ भी नहीं।

आओ रंग बांटे,
आओ संग बांटे,
खुशियाँ तो बहुत बाँटी हैं,
आओ कुछ गम बांटे...
10/03/2001

4 comments:

ज़ाकिर said...

आपकी कविताएं देखीं, अच्छी लगीं।
ज़्यादातर लोग खुशियां ही बांटते हैं। आपने गम बांटने की दावत दी है। मैं आपकी दावत कुबूल करता हूं।

SURJEET said...

Marvelous and unique. Haven’t seen someone an invitation of sorrow sharing. I hope if we all develop this feeling of sharing sorrow, happiness would eventually rise.

Rachna Singh said...

10/03/2001 आओ कुछ गम बांटे
Jun 2, 2007
fabulous play of words

VISHNU said...

VERY NICE....WOW U R GREAT
VISHNU