शब्दों मै भी तो रंग होते हैं,
या कहें हर शब्द एक रंग का नाम हैं,
तभी तो गीत, कहानी, ग़ज़ल, कविता
कितने रंग लिए होते हैं अपने आप में।
सभी रंग दिखाई नही देते;
महसूस भी किये जाते हैं,
सुख-दुःख, ख़ुशी-गम
और ना जाने कितने...
ये रंग ही तो हैं
जिनसे ज़िन्दगी चलती हैं,
ये ना हों
तो कुछ भी नहीं।
आओ रंग बांटे,
आओ संग बांटे,
खुशियाँ तो बहुत बाँटी हैं,
आओ कुछ गम बांटे...
10/03/2001
02 June 2007
आओ कुछ रंग बांटे
Posted by
Yatish Jain
at
1:21 AM
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3 comments:
आपकी कविताएं देखीं, अच्छी लगीं।
ज़्यादातर लोग खुशियां ही बांटते हैं। आपने गम बांटने की दावत दी है। मैं आपकी दावत कुबूल करता हूं।
Marvelous and unique. Haven’t seen someone an invitation of sorrow sharing. I hope if we all develop this feeling of sharing sorrow, happiness would eventually rise.
10/03/2001 आओ कुछ गम बांटे
Jun 2, 2007
fabulous play of words
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