18 June 2007

सांझे गम

कूलर पानी लेता हैं
ठंडक देता हैं,
AC पानी छोड़ता हैं
ठंडक देता हैं,
दोनो का ही काम
ठंडक देना हैं
एक का लेकर;
दूसरे का देकर;
'पानी'

गम भी कुछ
इसी तरह हैं,
कुछ गम लेने से
ठंडक मिलती हैं
कुछ बांटने से।
दोनो ही सूरत
सुकून देती हैं
यही होते हैं
"सांझे गम"

5 comments:

Udan Tashtari said...

बढिया तुलनात्मक रचना!

SURJEET said...

What a serious contrast you did, Yatish. The way you put the technical detail into a verse is amazing. You indeed are right that sadness can be shared but due to lack of awareness we never able to look into this practical aspect of life.

Rohit said...

यतीशजी बहुत सही, आप वो चीज दिका देते हैं जो आम आखों से दिखती नही हैं और तुलना का भी जवाब नही।

Rajat said...

Kya baat hai Bhaiya. The way you linked & compared both the things was gr8. Moreover, the simplicity with which you put it forward was amazing. Keep it up. God Bless.

Regards,
Rajat

sunita (shanoo) said...

तुलना तो बहुत अच्छी की है और सबसे अच्छी पंक्तियाँ लगी...
गम भी कुछ
इसी तरह हैं,
कुछ गम लेने से
ठंडक मिलती हैं
कुछ बांटने से।
दोनो ही सूरत
सुकून देती हैं
यही होते हैं
"सांझे गम"

शानू