चाह की कोई सीमा नहीं होती,
चाहते कितनी भी हो सकती हैं।
मन जब मचलता हैं
तो चाहतें जन्म लेती हैं,
पर सच्ची चाहत का जन्म
बिना शर्त होता हैं,
किसी की कमियों को
साथ लिए
उसे चाहना ही
सच्चा प्यार हैं।
ज़िन्दगी एक बार
मिलती हैं,
अपने खेल खेलती हैं,
हर रोज़ नयी कहानी
जन्म लेती हैं,
इसमें कोई भी
मन सा कभी भी
मिल सकता हैं,
और कभी मन सा
बनाना पड़ता हैं।
सच्ची चाहत को
बयाँ करना आसान नही हैं,
आसान हैं उसे महसूस करना
ग़र ज़िंदगी देती हैं ये मौका।
कभी लंबे साथ भी अधूरे रहते हैं
कभी कुछ पल के साथ हमेशा रहते हैं...
06 July 2007
चाह
Posted by
Yatish Jain
at
10:46 PM
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4 comments:
बहुत सुन्दर बेहद खूबसूरत एसा लगता है जैसे मेरे शब्द आपने छीन लिये जो मै महसूस करती हूँ आपकी कलम ने लिख डाला...बहुत अच्छा लगा...
सुनीता(शानू)
कभी लंबे साथ भी अधूरे रहते हैं
कभी कुछ पल के साथ हमेशा रहते हैं...
---बहुत खूब. इन दो पंक्तियों में तो मानो पूरी बात ही कह दी आपने. बधाई..अति सुन्दर.
make yourself complete in yourself and then enjoy all the other relationships
कभी लंबे साथ भी अधूरे रहते हैं
कभी कुछ पल के साथ हमेशा रहते हैं...
बहुत सुन्दर वर्णन ।
इन दो पंक्तियों में तो जैसे जीवन का सार छिपा है।
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